रविवार, 23 जनवरी 2011

सद्दाम की मुहब्बत


सरेबाजार के लिए
सुशील कुमार
sarebazar@gmail.com
नई दिल्ली, जनवरी 24, 2011 

क्रूर और तानासाह के रूप में पहचाने जाने वाले पूर्व ईराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के मन में भी क्या कभी प्रेम के कोमल कपोल फूटे थे ? विध्वंसक हथियारों से यारी रखने वाले शासक की धडकनों में क्या कोई प्यार भी प्रतिघ्वानित होता था?


जी हाँ! बात बड़ी रोचक लगती है लेकिन ये सच है | सद्दाम को प्यार हो गया था | ईराक के शक्तिशाली शासक एक आम लड़की "ज़बीबा" की मुहब्बत की गिरफ्त में था |

सद्दाम नें 'द आर्थर' के नाम से अपने जीवनकाल में कुछ लेखन किया है, जिनमें ढेरों कविताएँ और चार उपन्यास शामिल हैं |   सन 2000 से 2006 के बीच में प्रकाशित उनकी कुछ किताबें बेस्ट सेलर भी रहीं | सद्दाम ने अपनी प्रेम कहानी को "ज़बीबा एंड द किंग" नामक उपन्यास में बड़ी चतुराई और विस्तार से लिखा है | यह एक ताकतवर कद्दावर शासक और एक आम लड़की की प्रेम कहानी है |


ज़बीबा का पति क्रूर और बुरा इंसान है और वह अपनी पत्नी से बलात्कार करता है | ऐसे माहौल में जबीबा और सद्दाम के बीच प्रेम पनपने और परवान चढ़ने लगता है | उपन्यास में सद्दाम नें जबीबा और उसके पति के संबंधों को रूपक की तरह इस्तेमाल किया है | सद्दाम जबीबा को ईराक और उसके क्रूर पति को अमेरिकी सेना के रूप में देखता है | सोशल नेटवर्किंग साईट "फेसबुक" में भी उपन्यास के बारे में एक पेज ऑनलाइन मौजूद है जिसे यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है | विकिपीडिआ विश्वकोश में भी "ज़बीबा एंड द किंग" नामक उपन्यास के बारे में पढ़ा जा सकता है | विकिपीडिआ में सद्दाम की प्रेम कहानी के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करें |


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