बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

देवबंद में प्रगतिशील मौलाना

सरेबाज़ार के लिए 
सुशील कुमार
नई दिल्ली 2, फ़रवरी 2011 
sarebazar@gmail.com
मतौर पर मौलानाओं की छवि (खासकर भारत में) "लकीर का फकीर" या "दकियानूस" मज़हबपरस्त धर्मगुरु की तरह होती जा रही है | मौलाना वह होता है जो दीनी राह पर चलने के सही रास्ते बताता है | ग़लती हो जाने पर फ़तवा जारी कर देता है | और कई बार खुद ये फतवे ही विवादों की वजह बनते नज़र आते हैं | मौलाना वह होता है जो दीनी और दुनियावी दोनों ही लोगों को सही-गलत की पहचान बताता है |

अपने फतवों के कारण हमेंशा चर्चा में रहने वाले 145 साल पुराने दरुम उलूम, देवबंद से जब भी कोई फ़तवा जारी होता है , पूरे मुल्क में चर्च-परिचर्चा शुरू हो जाती है | देवबंद बहुत ही शख्त पाबन्दी वाले फतवों के लिए मशहूर हो चूका है | मौलानाओं द्वारा जारी फतवे भी कमाल के होते हैं जैसे ''दवा में अल्कोहल का इस्तेमाल हराम है'' , या ''औरतों को नौकरी नहीं करनी चाहिए'', या ''कैमरेवाले मोबाईल गैर इस्लामी हैं'', या ''लड़के-लड़कियों की पढाई साथ-साथ नहीं होनी चाहिए'', या इस्लाम टेस्ट-ट्यूब बेबी की इजाजत नहीं देता'' इत्यादि | फ़तवा कोई सामान्य आदेश नहीं होता है बल्कि इसके साथ इसे मानने की पाबन्दी जुडी होती है | हर फ़तवा किसी न किसी सन्दर्भ के साथ, किसी की याचिका पर जारी होता है | कई फतवे मजहबी पंडितों के लिए वाजिब जरूर लगते होंगे लेकिन एक आम मज़हबपरस्त इंसान के लिए कभी-कभी जी का जंजाल भी बन जाते हैं |

देवबंद से अब बदलाव की बयार बहने लगी है | अपने प्रगतिशील विचारों के कारण देवबंद के कुलपति ''मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी'' आजकल खासी चर्चा में हैं | 145 वर्ष पुराने इस संस्थान के वे पहले कुलपति हैं जो उत्तर प्रदेश के बाहर के हैं | वस्तानवी प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति हैं और उन्हें इस बात का भी इल्म है कि आज़ादी की लडाई में देवबंद नें कितनी बड़ी भूमिका निभायी है | वस्तानवी एमबीए हैं और विज्ञान, मेडिकल, इंजिनीयरिंग की पढ़ाई के पक्षधर हैं | अब लोगों का ये भ्रम भी दूर हो जायेगा कि देवबंद में केवल उर्दू, अरबी और फारसी पढ़ाई जाती है |

दरुम उलूम से निकलने वाले नए फतवे अब मुसलामानों को नयी पहचान और दिशा दे सकते हैं जैसे "मुस्लिम किसी को भी वोट देने के लिए आज़ाद हैं" और "वे चाहें तो वन्दे मातरम गा सकते हैं " आदि | शिक्षाविद होने के साथ-साथ वस्तानवी एक कुशल संगठनकर्ता भी है| उनहोंने पूरे भारत में मदरसों का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया है | वे मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के सदस्य भी हैं | उन्हें महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित 'मौलाना अबुल कलाम अवार्ड से नवाज़ा जा चुका है | कुलपति का पद संभालने के बाद ही उन्होंने साफ़ कर दिया था कि अब फतवे विस्तृत रूप से जारी किये जायेंगे क्योंकि कई बार फतवों की गलत व्याख्या भी कर दी जाती है | इसके लिए अब इन्टरनेट का भी सहारा लिया जायेगा ताकि फतवे सही रूप में लोगों तक पहुच सके |

लेकिन आगे के बजाय पीछे देखने वाले लोगों की आँखों में वस्तानवी किरकिरी की तरह चुभने लगे हैं | कुछ लकीर के फकीर मौलाना वस्तानवी के इस्तीफे की मांग कर रहें हैं | हालाँकि दुनिया भर में वस्तानवी के विरोधियों की बड़ी भार्त्स्रना हो रही है | मलेशिया नें साफ़ कह दिया है कि अगर वस्तानवी को इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया तो देवबंद के छात्रों का नामांकन मलेशिया में नहीं होने दिया जायेगा | स्वयं मौलाना वस्तानवी विरोधियों को करारा जवाब देते हुए कहा है कि वे इतनी आसानी से इस्तीफा देने वाले नहीं हैं |

अभी देवबंद को मौलाना वस्तानवी जैसे प्रगतिशील नेतृत्वकर्ता की जरुरत है |

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