शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

भगवा मौलाना उगल रहे है जहर

सरेबाज़ार के लिए 
सुशील कुमार 
नई दिल्ली, फ़रवरी 12, 2011 
sarebazar@gmail.com 

खनऊ के मोहम्मद वाहिद चिस्ती जो कर रहे हैं, इस तरह की हिम्मत कुछ कम ही लोग करते हैं। चिस्ती उन 15 'भगवा मौलानाओं' में से हैं, जो शहर के मुस्लिम बहुल इलाके की गलियों में घूमकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं। ये लोग मच्चाली महल, मॉडल टाउन और बसई मस्जिद के मुस्लिम बहुल इलाकों में प्रचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि हमेशा से कट्टर हिंदुत्व की बात करने वाला आरएसएस आज-कल अपने साथ मुसलमानों को जोड़ने की मुहिम चला रहा है।

ये भगवा मौलाना अपने साथ एक पतली सी बुकलेट रखे हुए हैं, इसमें आरएसएस के विचार हैं। इसमें भगवा टेररिजम को लेकर फैलाई जा रही 'अफवाह' और राम जन्मभूमि आंदोलन की 'सही' जानकारी दी गई है।

यह बात अचरज की है लेकिन सच है कि जो खेल हिन्दू-मुस्लिम एकता के नाम पर खेला जा रहा है , वो बहुत खतरनाक है |   इस देश में लोगों को धर्म के नाम पर गुमराह करना बहुत आसानी से होने लगा है | चाहे धर्मप्रचार हो या धर्म के नाम पर जहर फैलाना, लोग बिना कोई सवाल किये, धार्मिक छुरी से बिना शोर मचाये हलाल होने को तैयार नज़र आते हैं |

वैसे मुसलामानों को टार्गेट की तरह क्रिसचन मिशनरियां बहुत पहले से ही देखते चली आई हैं | कई अलग पंथों जैसे निरंकारी, डेरा सच्चा सौदा और जुम्मा मसीह वरशिप फेलोशिप आदि मुस्लिम भाईयों को, कुरआन की अपने -अपने ढंग से व्याख्या करके, लुभाते चले आये हैं | लेकिन ये भगवा मौलाना कट्टरता की हद तक जा सकते है क्यूंकि संघ कभी भी सहिष्णुता की बात कर ही नहीं सकता |

ये भगवा-मौलाना आम मुसलमान को दिनी बन्दे की तरह दिख रहे है | संघ अपने घिनौने स्वरुप में आ रहा है | ये खाकी निक्कर वाले मौलानाओं और असीमानंद में खास अंतर नहीं है |

बहुत दुःख की बात है कि आम मुसलमान शाहनवाज़ और नकवी की सभाओं में फैज़ टोपी पहने कौम की मौजूदगी दर्ज कराने भर के लिए खिलौने की तरह इस्तेमाल किये जाते हैं |

कहीं एक-दो जगहों पर नहीं बल्कि देश भर में संध का "गृह संपर्क" अभियान चल रहा है , ये खतरनाक है क्यूंकि इसमें बहरूपियों को अल्लाह-वाला बना कर एक नए तमाशे के लिए षड़यंत्र रचा जा रहा है | हिटलर कहता था कि एक झूठ को सौ बार बोलो तो सच हो जाता है और संघ अपनी नाजीवादी निति के तहत गुजरात, मालेगांव जैसी घटनाओं को मुसलामानों के मुंह से ही न्यायसंगत कहलवाने का धिनौना खेल खेल रही है|

5 टिप्‍पणियां:

  1. @ सुशील भाई, संघ की नई चाल है और ये लोभी मौलाना मुस्लिम और इस्लाम दोनो को बदनाम कर रहें हैं, इनका ना तो मुस्लमान से कुछ सरोकार है और ना ही इस्लाम से, ये तो पैसे के लोभी हैं,

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  2. लोभी मौलाना Shahnabaz Adbani aur Mukhtar Abbas Modi ke santan hain

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  3. vaah! aba bhagava maulanaa bhi? abhi tak to ham hare maulanaoko sun rahe the.....topi pahan kar ,tushtikaran ke dvaraa, aag ugalate.dharmki bhavana bhadakaa kar...bhagava maulanaa ho yaa hara donho me kya fharak?.....jadi rss me maulana aa gaye to hare maulanaokaa kya goga? unaki dunadari jo chal rahi hai vah band ho jayegi.esiliye ye bhagava maulanaa se dare huye hai..

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  4. हरा मौलाना और भगवा मौलाना?
    आज तक हम हरा मौलाना हि सुनते थे.आग उगलते,फतवा,जारी करते तोपी पहने.वाह!अब तो भगवा मौलाना भी? ...भगवा मौलाना हो या हरा दोन्हो में क्या फरक ? .....जदी आर एस एस में मौलाना आ गए तो हरे मौलानाओं का क्या होगा? उनकी दुकानदारी जो चल रही है वह बंद हो जाएगी..इसीलिए हरे मौलाने भगवा मौलानाओं से डरे हुए है .. उनके लिए तो वे खतरनाक है ही.

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