रविवार, 26 जून 2011

यू.पी. में सरकार द्वारा मिडिया की स्वतंत्रता पर हमला

सरेबाजार के लिए
सुशील कुमार
जून 27 , 2011


लखनऊ । एक बारफिर लोकतंत्र में शर्मसार कर देने वाली घटना तहजीब के शहर लखनऊ में सामने आयी है , जहाँ  सच बोलने पर  आईबीएन7 की टीम पर लखनऊ पुलिस ने हमला किया है। सीएमओ हत्याकांड और डॉ. सचान की मौत की खबर का पर्दाफाश करने वाले आईबीएन7 ब्यूरो चीफ संवाददाता शलभमणि त्रिपाठी को लखनऊ पुलिस उठा कर ले गई और उनके साथ बदसलूकी की गई।

मौके पर मौजूद आईबीएन7 एक और संवाददाता मनोज राजन त्रिपाठी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हजरतगंज इलाके में आईबीएन7 की पूरी टीम मौजूद थी तभी एडिशनल एसपी बी पी अशोक और सीओ अनुप कुमार वहां आए और आईबीएन7 के पत्रकार शलभमणि त्रिपाठी और उनके साथ मारपीट करने लगे। यही नहीं, शलभमणि के कपड़े फाड़ दिए गए और उन्हें जबरन उठाकर हजरतगंज थाने ले जाया गया और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई। इस खबर को लखनऊ में फैलते ही तमाम पत्रकार हजरतगंज थाने पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद शलभमणि को छोड़ा गया।

पुलिस से छूटते ही शलभमणि ने खुद बताया कि पुलिस के इन दोनों अधिकारियों ने गाली-गलौज करते हुए कहा कि किसी महिला को पकड़कर लाओ और इसे गलत केस में फंसाते हैं तब इन लोगों को होश ठिकाने में आएगा। शलभमणि ने कहा कि इन दोनों अधिकारियों ने अपने जूनियर पुलिस वालों से कहा कि इसे पीटो और लाकऑप में बंद करो, जब पुलिस वालों ने पीटने से इनकार किया तो उन्हें सस्पेंड करने की धमकी दी गई।

शलभमणि ने बताया कि उन्हें डराने की कोशिश की गई, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से वो डॉक्टर सचान की मौत को लेकर कई खुलासे कर रहे थे। शलभमणि ने कहा कि वो इस धमकी से डरने वालें हैं वो सच को सामने लाते रहेंगे। इस घटना की तमाम राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी निंदा की है। तमाम पत्रकारों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री मायावती के घर के बाहर प्रदर्शन करते हुए दोषी पुलिस अफसरों को सस्पेंड करने की मांग की है। सरकार की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कौन अधिकारी हैं दोषी
  • सीओ अनूप कुमार और
  • एडिशनल एसपी बी. पी. अशोक

कुछ महत्वपूर्ण सवाल जो सहज रूप से सामने आ रहे हैं कि :
अफसरों01 .  आखिर किसके इशारे पर पुलिस के आलां ने मीडिया पर ये दमनकारी एक्शन लिया ?
02 . क्या सरकार कि शह के बिना पुलिस ऐसा कर सकती है ?
03 .  क्या उत्तर प्रदेश सरकार डाक्टर सचान हत्या मामले में बेबाक पत्रकारिता से बौखला गयी है ?
04 .  लखनऊ के तमाम पत्रकारों द्वारा मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा अनसुना कर देना, क्या तानाशाही नहीं है? 

इस बीच खबर आयी है कि आनन् फानन में दोनों दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है |

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