मंगलवार, 20 अगस्त 2013

जनजागृति के नायक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की गोली मार कर हत्या

स्वर्गीय डॉ. नरेंद्र दाभोलकर
जादू-टोना, चमत्कार जैसे अंधविश्वासों के खिलाफ 25 वर्षो से जागरूकता अभियान चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की मंगलवार को पुणे में बाइक सवार दो युवकों ने गोली मार कर हत्या कर दी गई। वारदात के विरोध में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पुणे में बुधवार को सर्वदलीय बंद का आह्वान किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने के साथ ही हमलावरों की गाड़ी का नंबर तथा एक हत्यारे का स्केच जारी किया है। वहीं, मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण और गृहमंत्री आरआर पाटिल ने दाभोलकर की मौत को अपूरणीय क्षति बताया है। चह्वाण ने हत्यारों का सुराग देने वाले को 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है।

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर सुबह की सैर के बाद घर लौट रहे थे। करीब 7.20 बजे ओंकारेश्वर पुल पर पीछे से आए बाइक सवार युवकों ने उन पर गोलियां दाग दीं। सिर और पीठ पर गोलियां लगने से दाभोलकर की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस को हमलावरों की बाइक का नंबर पता चल गया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से एक हत्यारे का स्केच भी तैयार किया गया है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है।

पुलिस की मानें तो उनकी हत्या पूर्वनियोजित तरीके से की गई। दो हमलावर घात लगाए बैठे थे और जैसे ही डॉ दाभोलकर सुबह की सैर पर निकले ओंकारेश्वर मंदिर के पास उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया। उन्हें चार गोलियां लगीं।
बुरी तरह घायल डॉ. दाबोलकर को ससुन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, डेक्कन जिमखाना पुलिस स्टेशन, मनोहर जोशी ने बताया कि हमलावर पीछे से आए और गोलियां चलाकर मोटरसाइकिल पर सवार होकर भाग गए। सिर के पिछले हिस्से में दो गोलियां लगी हैं। डॉ. दाभोलकर के हत्यारों की मोटरसाइकिल का नंबर 7756 था। पुलिस ज्यादा जानकारी के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने में जुटी है। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक हमलावरों की उम्र 25 से 27 साल थी। एक हमलावर ने टोपी पहन रखी थी और नाम पूछने के बाद उसने बेहद करीब से डॉ. दाबोलकर पर गोली चलाई। सूत्रों की मानें तो डॉ. नरेंद्र दाबोलकर मंगलवार को ही अंधश्रद्धा निर्मूलन विधेयक को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे।

वे आजकल अमानवीय रीतियों एवं अंधविश्वासों के खात्मे के लिए प्रस्तावित अंधविश्वास और काला जादूरोधी विधेयक पारित कराने के लिए महाराष्ट्र सरकार पर दबाव डालने का अभियान चला रहे थे। कहा जा रहा है कि इससे वरकारी पंथ से जुड़ा एक वर्ग डॉ. दाबोलकर के खिलाफ हो गया था। हाल ही में कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने उन्हें धमकी भी दी थी। 

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने 80 के दशक में अंधविश्वास, कर्मकांड के खिलाफ नासिक जिले से जागरूकता अभियान शुरू किया था। 1989 में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एमएएनएस) का गठन किया जो वैज्ञानिक तरीके से जादू-टोना और अंधविश्वासों को गलत सिद्ध करता है। संगठन की 200 शाखाओं के पांच हजार कार्यकर्ता गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाते हैं। दाभोलकर के प्रयासों से ही महाराष्ट्र में जादू-टोना विरोधी विधेयक भी पेश किया गया, लेकिन कुछ सदस्यों के विरोध के कारण पिछले कई सत्रों में यह पारित नहीं हो सका।

डॉ.नरेंद्र दाभोलकर की हत्या से उनके वैचारिक विरोधी भी सकते में हैं। सनातन संस्था एवं हिंदू जनजागृति समिति ने घटना को दुखद बताया है। साथ ही निजी रंजिश के बिंदु पर भी छानबीन किए जाने की मांग की है।
हिंदू जनजागृति के समन्वयक सुनील घनवट ने हत्याकांड की निंदा करते हुए कहा, हालांकि कई मुद्दों पर हमारा दाभोलकर से वैचारिक मतभेद था, लेकिन अंधविश्वासों के खिलाफ हम उनके अभियान के प्रशंसक है। सनातक संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने कहा, संगठन को डॉ.दाभोलकर की मौत से गहरा दुख पहुंचा है। उतना ही धक्का इस बात से भी लगा है कि कुछ लोग सनातन संस्था को इसके लिए दोषी मान रहे हैं।

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